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Realstate Question paper for interviewee

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Friday, April 14, 2023

General process for resale for commercial and Residential properties in Noida

यदि आप मकान, फ्लैट या कोई और प्रॉपर्टी रीसेल में खरीदना चाहते हैं तो इन बातों पर जरूर ध्यान दीजिएगा:-



ओरिजनल दस्तावेज:- प्रॉपर्टी खरीदने से पहले ओरिजनल डॉक्युमेंट्स:- यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जिस व्यक्ति से आप प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं, उसके पास प्रॉपर्टी का मालिकाना हक है या नहीं। अगर वह प्रॉपर्टी लोन लेकर खरीदी गई है तो बैंक के पास ओरिजनल टाइटल डॉक्युमेंट्स होंगे और आप उन्हें देखने के लिए बैंक से कह सकते हैं ।

सेल डीड या टाइटल डीड:- यह दिखाता है कि घर की बिक्री हो गई है और विक्रेता ने खरीददार को प्रॉपर्टी का मालिकाना हक सौंप दिया है। टाइटल/सेल डीड संपत्ति का दस्तावेज होता है, जो भविष्य में बिक्री के लिए मालिकाना हक का प्राथमिक सबूत होता है।

 एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट :-

यह सर्टिफिकेट बताता है कि आपकी प्रॉपर्टी के ख़िलाफ़ कोई बकाया वसूली या दावा तो नहीं है। अगर *एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट* साफ़ सुथरा है,यानि कि वो यह  दर्शाता है कि आपकी प्रॉपर्टी पर कोई ऋण या किसी अन्य प्रकार की बिक्री की रोक नहीं है ।   

नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट NOC:- 

बिल्डर को सभी मुख्य सरकारी विभागों जैसे बिजली विभाग,पानी विभाग, दमकल विभाग आदि से NOC या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना ज़रूरी होता है।

 कर/टैक्स  की रसीद:-

अगर आप एक ऐसी प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं,  जो फिर से बेची जा रही है तो हमेशा पिछले तीन सालों की टैक्स रसीदों की मांग करें। इससे ये पता चलता है की प्रॉपर्टी के खिलाफ कुछ बकाया तो नहीं है ।

 वकील से मदद:- जिस प्रॉपर्टी को आप रीसेल में खरीदने जा रहे हैं, वह किसी झमेले में तो नहीं फंसी है।  साथ ही वकील आपको यह भी बता देगा कि कहीं यह प्रॉपर्टी किसी भी रूप में गिरवी तो नहीं रखी गई है या कहीं इसकी जमानत तो नहीं दी गई है। रीसेल प्रॉपर्टी जमानत या गिरवी रखी होने पर विक्रेता के लिए तुरंत सौदा करना संभव नहीं हो पाता है। 

 कैश या चेक:- ज्यादतर प्रॉपर्टी बेचने वाला सेलर बेची गई राशि पर कोई टैक्स नहीं चुकाना चाहता। 

 प्रॉपर्टी पर कुछ बकाया न हो:- रीसेल प्रॉपर्टी खरीदने से पहले यह देख लेना जरूरी है कि विक्रेता ने प्रॉपर्टी टैक्स, पानी का बिल, सोसायटी के मेंटेनेंस चार्जेस और बिजली बिल आदि का भुगतान किया है या नहीं। अगर भुगतान नहीं हुआ हो तो प्रॉपर्टी आपके नाम पर ट्रांसफर होने के बाद सारी देनदारियां आपको चुकानी होंगी।

रिपेयर की लागत:- प्रॉपर्टी खरीदत वक्त इस बात ख्याल रखना चाहिए की उसमें कराने के लिए ज्यादा काम तो नही है क्योंकि वह खर्चा भी खरीददार को वहन करना होता है।

पडोसियों के बारे में जान लें:-  क्या आप उसके आस-पास के इलाके का अच्छी तरह मुआयना कर चुके हैं? जहां आप प्रॉपर्टी खरीद कर रहना चाहते हैं, क्या आप उसके आस-पास के इलाके का अच्छी तरह मुआयना कर चुके हैं? 

फीस एवं चार्ज:-

किसी भी संपत्ति को खरीदते वक्त सरकार द्वारा लगाए गए कई शुल्कों का भुगतान करना पड़ता है। इसमें पंजीकरण फीस, स्टांप फीस, हस्तांतरण फीस एवं उपयोगिता हस्तांतरण शुल्क शामिल हैं। संपत्ति को खरीदने के लिए एजेंट की मदद लेने पर इसमें ब्रोकरेज फीस भी जुड़ जाएगी। ग्राहकों को यह बात याद रखनी चाहिए कि कानून के तहत सभी रियल एस्टेट ब्रोकर्स के लिए स्टेट RERA में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है ताकि वे कानूनी तौर पर ऑपरेट कर सकें ।

RERA:- खरीददार को यह मालूम जरूर करना चाहिए कि जिस प्रोजेक्ट में वह घर खरीदना चाहता है, वह RERA में रजिस्टर्ड है या नहीं। RERA की आधिकारिक वेबसाइट पर हर राज्य के बिल्डर के खिलाफ दर्ज शिकायत होती है, जिससे डिवेलपर और प्रोजेक्ट की क्रेडिबिलिटी की जानकारी मिलती है और खरीददार को विकल्प चुनने की आजादी। 


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Omprakash Sharma, Sales Manager ☎️7289904595

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